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Case presentation: बिस वर्त्म रोग (XANTHELASMA)आयुर्वेदीय चिकित्सा व्यवस्था by Vaidyaraja Subhash Sharma

[8/31, 2:33 PM] Vaidyaraj Subhash Sharma: 

*case presentation - 

बिस वर्त्म रोग XANTHELASMA वर्तमान की प्रमुख व्याधि एवं आयुर्वेदीय चिकित्सा व्यवस्था ...*

*इस प्रकार के रोगी बहुधा मिलेंगे जो लेखन कर्म या laser treatment कराते हैं ...*






[8/31, 2:33 PM] Vaidyaraj Subhash Sharma: 

*आज 31-8-22 की स्थिति जिसमें रूग्णा पूर्ण स्वस्थ है ..*


[8/31, 2:33 PM] Vaidyaraj Subhash Sharma: 

*1 - रूग्णा / 45 yrs F/ house wife*
*मुख्य वेदना - menopause लक्षण जो अल्पकालिक रहते है, उदर वृद्धि के कारण कदाचित श्वास कृच्छता एवं अक्षि वर्त्म में श्वेत शोथ सदृश उभार से मनोउद्वेग।*

*history of present illness -

 कोई विशिष्ट नही मात्र अल्प मेदस्वी height 5'4 और body wt. 69 kg.*

*पूर्व व्याध वृत्त - कोई विशिष्ट नही *

*अष्टविध एवं अन्य भाव परीक्षा - *

*नाड़ी - पित्त और अल्प कफ*
*मूत्र - कदाचित पीत एवं दाह युक्त जो अति जलपान से सम्यक्*
*मल - प्रायः अल्प*
*जिव्हा - मलिन *
*शब्द - तीव्र एवं बहुवाक् प्रवृत्ति, हमारे भी कान खा जाती है।*
*स्पर्श - स्निग्ध *
*दृक - सामान्य पर चंचल*
*आकृति - प्राकृत *

*हम सैद्धान्तिक चिकित्सा करते हैं इसलिये शल्य साध्य व्याधि होने से सुश्रुत संहिता की शरण में गये और वहां हमें प्राप्त हुआ ....*

*पृथग्दोषाः समस्ता वा यदा वर्त्मव्यपाश्रयाः, सिरा व्याप्यावतिष्ठन्ते वर्त्मस्वधिकमूर्च्छिताः '*
*विवर्ध्य मांसं रक्तं च तदा वर्त्मव्यपाश्रयान् विकाराञ्जनयन्त्याशु नामतस्तान्निबोधत ' 

सु उ 3/ 3-4 *

*आचार्य सुश्रुत यहां स्पष्ट कर रहे हैं कि जब वात, पित्त और कफ अलग अलग या सम्मिलित रूप में प्रकुपित हो कर वर्त्म (वर्त्म को eyelids के रूप में देखा जाता है इन्हे द्वे वर्त्मनी नयनच्छदौ कहा है जो 'नयनगोलकावरकं निमेषोन्मेषाश्रयं पटलद्वयं वर्त्म उच्यते' है) के मध्य भाग में स्थित सिराओं में प्रसरित हो कर वर्त्म से स्थित हो मांस और रक्त की वृद्धि कर वहां रोग उत्पन्न कर देते हैं ।*

*वर्त्म क्षेत्र में 21 रोग बताये हैं जिनमें एक 'विसनामा' अर्थात बिस वर्त्म रोग भी है 

'शूनं यद्वर्त्म बहुभिः सूक्ष्मैश्छिद्रैः समन्वितम् बिसमन्तर्जल इव बिसवर्त्मेति तन्मतम्' 

सु उ 3/28 
अर्थात जिस प्रकार जल में उत्पन्न कमल (मृणाल या बिस) में अनेक छिद्र होते है वैसे ही वर्त्म में शोथ सहित अनेक सूक्ष्म छिद्र हो जाते हैं तथा यह रोग त्रिदोषज होते हुये भी साध्य है।*

*अपनी चिकित्सा में हमने अधिकतर एकांग मेदो वृद्धि fatty liver के रोगियों में और जिन रोगियों के lipid profile में असामान्यता होती है उन रोगियों में यह रोग प्रायः मिलता है मगर अनेक रोगियों में बिना इनकी विकृति के भी मिलता है । आचार्य सुश्रुत मांस और रक्त दुष्टि मानते हैं पर हमारा निजी मत है कि आधुनिक काल में मेद दुष्टि भी रोगियों में मिलती है।*

*सम्प्राप्ति घटक -*

*दोष - कफ क्लेदक - गुरू, मंद, स्थिर *
*पित्त - पाचक और भ्राजक पित्त*
*वात - व्यान और समान वात*
*दूष्य - रस, रक्त, मांस, मेद*
*स्रोतस - रक्त और मांस वाही*
*स्रोतोदुष्टि - संग*
*अग्नि- जाठराग्नि एवं धात्वाग्निमांद्य*
*उद्भव स्थल - आमाश्य - यकृत*
*अधिष्ठान - अक्षि वर्त्म प्रदेश*
*साध्यासाध्यता- कृच्छसाध्य या शल्यसाध्य*

*चिकित्सा सूत्र - पथ्यपालन, निदान परिवर्जन, लंघन, पाचन, रक्तशोधन, मेदक्षपण, शोथघ्न और शमन ।*

*प्रथम दो दिन - 

प्रातः 6 बजे पंचतिक्त घृत 20 ml, दोपहर 12 से 1 बजे द्रव कृशरा, सांय 7 बजे मूंग दाल या मसूर धुली सूप *

*तीसरे दिन प्रातः 6 बजे हरीतकी चूर्ण 5 gm जिस से दिन में 3-4 मल के वेग ।*

*4-14 दिन तक उपरोक्त आहार में यव की रोटी दिन में मात्र 2 और लोकी, तोरई, कच्चा सीताफल, टिण्डा, mix veg,  अंकुरित (उबाल कर) मूंग और मोठ।*

*दो सप्ताह में 3.6 kg wt. कम हुआ।*

*औषध में मात्र ...*

*शशिलेखा वटी 1-1 गोली*
*गंधक रसायन 1-1 गोली भोजन से आधा घंटा पूर्व *

*बीच में आरोग्यवर्धिनी 500 mg bd कर दी ।*







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Above case presentation & follow-up discussion held in 'Kaysampraday (Discussion)' a Famous WhatsApp group  of  well known Vaidyas from all over the India.
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Presented by-

www.kayachikitsagau.blogspot.com









Vaidyaraja Subhash Sharma

MD (Kaya-chikitsa)

email- vaidyaraja@yahoo.co.in


Compiled & Uploaded by-

Vd. Rituraj Verma
B. A. M. S.
Shri Dadaji Ayurveda & Panchakarma Center,
Khandawa, M.P., India.
Mobile No.:-
 +91 9669793990,
+91 9617617746

Edited by-

M.D., PhD (KC) 
Professor & Head
P.G. Dept of Kayachikitsa
Govt. Akhandanand Ayurveda College
Email: kayachikitsagau@gmail.com
Mobile No. +91 9408441150




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