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SWOT ANALYSIS OF AYURVEDA (आयुर्वेद का स्वाॅट विश्लेषण):- डॉ. सुनील वशिष्ठ

SWOT ANALYSIS OF AYURVEDA
(आयुर्वेद का स्वाॅट विश्लेषण)
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तेज़ी से बदल रहे विश्व में हरेक व्यक्ति, संस्था, व पद्धति का स्वाॅट विश्लेषण (SWOT Analysis) अनिवार्य होता जा रहा है। यह बात आयुर्वेद पर भी पूर्णरूपेण लागू होती है।
SWOT क्या है?
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S: Strength (शक्ति)
W: Weakness (दुर्बलता)
O: Opportunities (अवसर)अद्य डॉ. सुनील  वशिष्ठ
T: Threats (भय)

शक्ति (Strength) व दुर्बलता (Weakness) भीतर रहते हैं, तथा अवसर (Opportunities) व भय (Threats) बाहर रहते हैं।
I. आयुर्वेद की शक्ति
(Strength)
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1. आयुर्वेद का वैज्ञानिक (Scientific), सार्वभौमिक (Universal), व शाश्वत (Eternal) सिद्धांतों पर आधारित सम्पूर्ण जीवन विज्ञान होना;
2. समय की कसौटी पर खरा उतर कर विश्व के असंख्य लोगों को स्वास्थ्य प्रदान करने का गौरवपूर्ण इतिहास;
3. समष्टिपूर्ण दृष्टिकोण (Holistic approach) के कारण जीवन के सभी पहलुओं - स्वास्थ्य व रोग, जीवन व मृत्यु, व्यक्ति व ब्रह्माण्ड - से  जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु प्रयास करना;
4. औषधियों में रोगों की वास्तविक चिकित्सा करने की क्षमता;
5. औषधियों में कुप्रभावों का कम / न होना (विषों को छोड़);
6. संशमन के साथ-साथ संशोधन (पंचकर्म) चिकित्सा का होना;
7. आयुर्वेद का अध्ययन करने आने वाले छात्रों का उच्च बौद्धिक स्तर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यावहारिक सोच, स्पष्टवादिता, व कुछ कर दिखाने की ज्वलंत भावना;
8. विशेषकर युवा वैद्यों में आपस में संघर्ष के बजाय सहयोग करने की सराहनीय प्रवृत्ति।
II. आयुर्वेद की दुर्बलता
(Weakness)
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1. कतिपय वैद्यों का आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों को भली प्रकार से न समझना, व चिकित्सा कार्य में उनका सम्यक् उपयोग न करना, अथवा मिथ्या उपयोग करना;
2. चिकित्सा विधियों का आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप न होना;
3. तेज़ गति से कार्य करने वाली औषधियों का अभाव;
4. संज्ञाहरण (Anesthetics), गहन वेदनाहर (Potent analgesics), दारुण संक्रमणहर (Strong anti-infective) औषधियों का नितांत अभाव;
5. क्षारसूत्र को छोड़, आयुर्वेदीय शल्य चिकित्सा का वर्तमान युगानुरूप (Upsated) न होना;
4. वैद्य समाज के एक बड़े वर्ग द्वारा  (अपने-अपने कारणों से) आयुर्वेद के स्थान पर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को अधिमान देना;
5. अन्य वैद्यों के विचारों के प्रति असहिष्णुता व अपने ही विचारों को सार्वभौमिक सत्य मानने की कतिपय वैद्यों की प्रवृत्ति;
6. सुनियोजित, दिशानुरूप, व सार्थक अनुसंधान (research) का अभाव;
7. कतिपय वैद्यों का दूसरे वैद्यों के साथ अपना अर्जित ज्ञान व अनुभव सांझा न करने की प्रवृत्ति;
8. कतिपय अध्यापकों द्वारा छात्रों को आयुर्वेद के प्रति निरन्तर निरुत्साहित करने की प्रवृत्ति;
9. कतिपय वैद्यों द्वारा आयुर्वेद में कुछ भी संशोधन, सुधार, व परिवर्तन न करने की हठधर्मिता;
10. कतिपय आयुर्वेद कॉलेजों में शिक्षा व व्यावहारिक चिकित्सा का स्तर आवश्यकता से नीचे होना;
11. कतिपय आयुर्वेदीय औषध निर्माता कम्पनियों द्वारा स्तरहीन व प्रभावहीन औषधियों का निर्माण;
12. आयुर्वेद में तकनीक (Technology) का समावेश न होना।
III. आयुर्वेद के लिए सुअवसर
(Opportunities)
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1. भारतीय समाज के अधिसंख्य लोगों का आयुर्वेद पर दृढ़ विश्वास, इसके साथ भावनात्मक जुड़ाव, व इसे अपनाने की स्वीकार्यता;
2. भारत व विश्व में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के प्रति लोगों का तेज़ी से होता मोह भंग, उन्हें अनायास सर्वश्रेष्ठ विकल्प 'आयुर्वेद' की ओर धकेल रहा है;
3. भोजन-वस्त्र-गृह की आवश्यकता पूर्ण होने के पश्चात्, अब स्वस्थ, सुन्दर, युवा, व क्रियाशील रहने की लोगों की बढ़ती प्रवृत्ति, जिसमें आयुर्वेद निश्चित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है;
4. अधिकाधिक सरकारी विभागों (अब कदाचित् सेना भी) द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा को दी जाने वाली मान्यता;
5. कतिपय बीमा कंपनियों द्वारा कतिपय अवस्थाओं में आयुर्वेद चिकित्सा के भुगतान की नवप्रवृत्ति (अभी काफी कुछ करना बाकी है);
6. माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दिशानिर्देशों पर केन्द्र व की राज्य सरकारों द्वारा आयुर्वेद को बढता राज्याश्रय।
IV. आयुर्वेद के लिए भय
(Threats)
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1. चिकित्सा-विधियों व उनके परिणामों का, समाज की इच्छाओं व आकांक्षाओं के अनुरूप न होने से, कई लोग चाहते हुए भी आयुर्वेद को अपना नहीें पाते व अन्य चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने के लिए बाध्य हो जाते हैं;
2. आयुर्वेद की वानस्पतिक औषधियों में से निकाले गए कार्यकारी तत्वों (active principles - alkaloids, glycoside etc. and their fractions) का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में तेज़ी से हो रहा समावेश  (eg, curcumin) जबकि आयुर्वेदीय औषध निर्माण में इनके उपयोग की मनाही;
3. तेज़ी से कम होती जा रही आयुर्वेद की औषधियाँ;
4. अधिकांश ऐलोपैथिक डाॅक्टरों द्वारा आयुर्वेद के विरुद्ध ईर्ष्यावश किया जाने वाला निरन्तर दुष्प्रचार;
5. कतिपय सरकारी अधिकारियों का निजी स्वार्थों, आयुर्वेद की सही जानकारी के अभाव, अथवा आयुर्वेद के प्रति असहिष्णुता के कारण इसके विकास में बाधक होना;
6. आयुर्वेद में प्रयुक्त होने वाली कच्ची औषधियों (Raw drugs) के लगातार बढ़ते मूल्य, व इससे निर्मित औषधियों (Finished medicines) की लगातार हो रही मूल्य वृद्धि;
7. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की चकाचौंध, तेज़ी से कार्य करने वाली औषधियों, आधुनिक औषधि निर्माता कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रलोभनों, व ऐलोपैथिक डाॅक्टरों की सरलता से ज्ञान व अनुभव सांझा करने की प्रवृत्ति से आयुर्वेद के युवा चिकित्सकों का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की ओर आकर्षित होना।

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Clinical Registrar
Deptt of Kayachikitsa, IPGT&RA, Gujarat Ayurved University, 1986-88
Consultant Cardiologist (Ayurveda)
Dr. Vasishth's Ayurveda Center & Heart Clinic, Jammu, 1988 onwards
Managing Director,
Dr.Vasishth's AyuRemedies, Ahmedabad (Gujarat)
2008 onwards
Dr.Vasishth
M. + 91-9419205439

Email : drvasishthsunil@gmail.com 
Website : www.drvasishths.com

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